परिचय
हिंदू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। इन सभी की उत्पत्ति का रहस्य ज्योतिर्लिंग बनने की कथा से जुड़ा है। यह कथा बताती है कि शिव ही सृष्टि के आदि और अनंत हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह ज्योतिर्लिंग की कथा ब्रह्मा और विष्णु के विवाद से शुरू होती है और शिव की सर्वोच्चता को सिद्ध करती है।
एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच यह विवाद हुआ कि दोनों में से कौन श्रेष्ठ है।
ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्होंने सृष्टि की रचना की है, इसलिए वे सबसे बड़े हैं।
विष्णु जी ने कहा कि वे पालनकर्ता हैं, इसलिए वे श्रेष्ठ हैं।
यहीं से ज्योतिर्लिंग बनने की कथा का आरंभ होता है।
जब विवाद बढ़ा तो अचानक उनके सामने एक अनंत अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ। न उसका आदि दिख रहा था और न अंत।
विष्णु जी वराह रूप में नीचे गए।
ब्रह्मा जी हंस रूप में ऊपर की ओर गए।
लेकिन कोई भी उस स्तंभ का आरंभ या अंत नहीं पा सका। यही अग्नि स्तंभ आगे चलकर शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुआ।
अंततः भगवान शिव उस अग्नि स्तंभ से प्रकट हुए और बोले –
“तुम दोनों मेरे अंश हो, मैं ही सृष्टि का आदि और अनंत हूँ।”
इस प्रकार ज्योतिर्लिंग बनने की कथा ने स्पष्ट कर दिया कि भगवान शिव ही सर्वोच्च शक्ति हैं।
कहा जाता है कि पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ, गुजरात में प्रकट हुआ। इसके बाद 11 अन्य स्थानों पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्थापित हुए।
सोमनाथ – गुजरात
मल्लिकार्जुन – आंध्र प्रदेश
महाकालेश्वर – उज्जैन, मध्यप्रदेश
ओंकारेश्वर – मध्यप्रदेश
केदारनाथ – उत्तराखंड
भीमाशंकर – महाराष्ट्र
काशी विश्वनाथ – वाराणसी, उत्तरप्रदेश
त्र्यंबकेश्वर – महाराष्ट्र
वैद्यनाथ – झारखंड
नागेश्वर – गुजरात
रामेश्वरम – तमिलनाडु
घृष्णेश्वर – महाराष्ट्र
ज्योतिर्लिंग की कथा हमें सिखाती है कि भगवान शिव ही सृष्टि के मूल और अंतिम सत्य हैं। इन ज्योतिर्लिंगों का दर्शन भक्तों को पापमुक्त करता है और मोक्ष की प्राप्ति कराता है।
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