Shiva को समर्पित शिव तांडव स्तोत्रम् एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना रावण ने की थी। यह स्तोत्र भगवान शिव की शक्ति, सौंदर्य, और उनके तांडव नृत्य का अद्भुत वर्णन करता है।
यह स्तोत्र केवल भक्ति नहीं, बल्कि ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है।
जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं
चकार चण्ड ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
👉 अर्थ:
जिनके जटाओं से गंगा की पवित्र धारा बह रही है और गले में सर्पों की माला है, ऐसे भगवान शिव अपने भयंकर तांडव से संसार को शक्ति प्रदान करते हैं।
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्ग मौक्तिकस्रजोः
गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्ष पक्षयोः।
तृणारविन्द चक्षुषोः प्रजामही महेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन् मनः कदा सदाशिवं भजे॥
👉 अर्थ:
शिव जी के लिए मित्र और शत्रु, सोना और मिट्टी, सब समान हैं। वे निष्पक्ष और करुणामय हैं।
शिव तांडव स्तोत्रम् केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि ऊर्जा और भक्ति का संगम है। इसे पढ़ने या सुनने से मन में शक्ति, शांति और स्थिरता आती है।
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