महाशिवरात्रि, हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार, भगवान शिव के प्रति श्रद्धांजलि भरी रात है। इस पवित्र रात का आयोजन हर साल होता है, और हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चौदहवीं तिथि को किया जाता है (फरवरी-मार्च)।
महाशिवरात्रि का आयोजन आध्यात्मिक महत्वपूर्ण है और इसे दुनियाभर में लाखों भक्तों द्वारा मनाया जाता है। “महाशिवरात्रि” शब्द का अर्थ होता है “शिव की महान रात,” और इसे भगवान शिव के ब्रह्माण्ड नृत्य के दिन के रूप में माना जाता है, जिसमें सृष्टि, स्थिति, और संहार के तांडव का आचारण होता है।
हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि भगवान शिव और गोदावरी पर्वती की विवाह दिन कहलाता है। भक्त मानते हैं कि इस शुभ रात्रि में भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया, जो सृष्टि और विनाश के ब्रह्माण्डिक समय-चक्र को प्रतिष्ठित करता है। इस रात्रि को शिव-पूजन और ध्यान के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।
भक्त इस पवित्र रात्रि को बहुत श्रद्धांजलि और समर्पण के साथ बिताते हैं। कई लोग दिन भर उपवास करते हैं और रात्रि भर जागरूक रहते हैं, शिव की स्तुति और मंत्र-जाप में लगे रहते हैं। यह जागरूकता मनोबल और आत्मा की उन्नति की दिशा में होती है।
तिथि और समय: 8 मार्च 2024
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 9 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी. 8 मार्च को और अगले दिन,
9 मार्च को शाम 6.17 बजे समाप्त होगा। हालांकि, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए महाशिवरात्रि
का त्योहार 8 मार्च को ही मनाया जाएगा.
महाशिवरात्रि के लिए निशिता मुहूर्त रात 12:07 बजे से 12:56 बजे तक रहेगा। 9 मार्च को निशिता पूजा दोपहर 12:12 से 1:01 बजे
के बीच होगी। महाशिवरात्रि पर पूरे दिन व्रत रखने के बाद अगले दिन 9 मार्च को पारण किया जाएगा। इस दिन पारण का शुभ समय 06 बजे
से है। : सुबह 37 बजकर 37 मिनट से दोपहर 03 बजकर 28 मिनट तक। पहर के अनुसार पूजा का समय:
रात की प्रथम प्रहर पूजा शाम 6:29 से 9:33 बजे के बीच होगी। 9 मार्च को रात्रि तृतीया प्रहर पूजा 12:37 से 3:40 बजे के बीच होगी।
9 मार्च को रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा 3:40 से 6:44 बजे के बीच होगी। शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) – हिंदी आर्टिकल Shiva को समर्पित शिव तांडव स्तोत्रम्…
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